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शुक्रवार, 1 अगस्त 2008

प्रश्‍न: मैंने कियोस्‍क खोले जाने हेतु बीसियों बार अपना ऑनलाइन पंजीयन एम पी ऑन लाइन पर कराया पर अभी तक मेरे किसी भी आवेदन पर एम पी ऑन लाइन ने कोई कार्यवाही नहीं की है और मेरा कियोस्‍क अधिकृत नहीं किया जा रहा है, मैं क्‍या करूं । - नाम पता प्रकाशित न करें

प्रश्‍न: मैंने कियोस्‍क खोले जाने हेतु बीसियों बार अपना ऑनलाइन पंजीयन एम पी ऑन लाइन पर कराया पर अभी तक मेरे किसी भी आवेदन पर एम पी ऑन लाइन ने कोई कार्यवाही नहीं की है और मेरा कियोस्‍क अधिकृत नहीं किया जा रहा है, मैं क्‍या करूं । - नाम पता प्रकाशित न किये जाने की विनय की गयी है

उत्‍तर : वैसे कियोस्‍क सेण्‍टर्स का कोई खास अर्थ नहीं हैं, और आप कियोस्‍क सेण्‍टर के बजाय '' ई सेण्‍टर'' या कॉमन सर्विस सेण्‍टर खोलें तो बेहतर होगा । वर्तमान में कार्यरत कियोस्‍क केवल म.प्र. शासन की वर्तमान सेवाओं तक सीमित हैं और वह भी जबरन बलपूर्वक बाध्‍यकारी सेवाओं तक सीमित हैं, (हमारी सूचनाओं के मुताबिक संभवत:इस संचालन के विरूद्ध जनहित याचिका निकट भविष्‍य में आ रही है)

आप अपने कियोस्‍क सम्‍बन्‍धी पंजीयनों को एकत्र कर स्‍वयं एक याचिका न्‍यायालय में प्रस्‍तुत कर सकते हैं, भ्रष्‍टाचार निवारण की योजना में भ्रष्‍टाचार एक संगीन बात है और अक्षम्‍य है, पहले आप चाहें तो सूचना का अधिकार अधिनियम का उपयोग कर म.प्र. शासन के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से आपके आवेदनों पर सम्‍पादित कार्यवाही का विवरण व दस्‍तावेज प्राप्‍त कर लें (जो कि किसी भी न्‍यायायिक कार्यवाही में आपको मददगार होंगें) इसके बाद सीधे न्‍यायालयीन कार्यवाही कर सकते हैं, आ चाहें तो सीधे ही पुराने पंजीयनों के आधार पर ही न्‍यायायिक प्रक्रिया प्रारंभ कर सकते हैं, मामला भ्रष्‍टाचार व अनसुनेपन से सम्‍बन्धित है, अत: बेहतर है कि भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग या भारत के प्रधानमंत्री को ऑन लाइन शिकायत भी भेज दें, इससे समस्‍या का त्‍वरित निवारण संभव होगा ।

कॉमन सर्विस सेण्‍टर या ई सेण्‍टर खोलने हेतु म.प्र. के विधानसभा चुनाव पश्‍चात ही कोई कार्यवाही करें, हमारी सूचनाओं के मुताबिक सर्विस सेण्‍टर एजेन्‍सी के टेण्‍टर और टेण्‍डरों की शर्त पालन में भारी धांधली व व्‍यापक भ्रष्‍टाचार हुआ है (इस योजना में कुछ परिवर्तन भी किये जा रहे हैं) अत: अधिक संभव है, सर्विस सेण्‍टर एजेन्‍सी के टेण्‍डर दोबारा होकर, पात्र एजेन्सियों को ही इसका क्रियान्‍वयन मिले । वैसे अभी स्‍टेट वाइड एरिया नेटवर्क, और स्‍टेट सर्वर तथा जिला स्‍तरीय एससीए सर्वर अभी स्‍थापित नहीं हुये हैं, दूसरी ओर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4(1)(अ) का पालन अभी म.प्र. में कहीं नहीं हुआ है, अत: म.प्र. के सरकारी विभाग अभी इस हैसियत में नहीं हैं कि कॉमन सर्विस सेण्‍टर अपना काम शुरू कर सकें, दूसरे यदि राज्‍य सरकार बदलती है तो पूरी प्रक्रिया नये सिरे से प्रारंभ होगी, म.प्र. के लिये इस प्रक्रिया को पुन: अपनाना ही आवश्‍यक होगा । सो अभी प्रतीक्षा ही बेहतर होगी । कॉमन सर्विस सेण्‍टर्स पर हम आलेख श्रंखलाबद्ध प्रकाशित कर रहे हैं, आप इसे पढ़ते रहें ।

 

प्रश्‍न : आपकी वेबसाइट पर आलेख प्रकाशित हुआ था, "राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए वेब-आधारित नया साफ्टवेयर" कृपया बतायें ये सब कब से होगा – मोनालिसा तिवारी, पता नहीं लिखा गया है

प्रश्‍न : आपकी वेबसाइट पर आलेख प्रकाशित हुआ था, "राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए वेब-आधारित नया साफ्टवेयर" कृपया बतायें ये सब कब से होगा – मोनालिसा तिवारी, पता नहीं लिखा गया है

 

उत्‍तर : प्रिय मोनालिसा जी, आपने जिस आलेख की चर्चा की है वह भारत सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति है, और हमें ई मेल से भारत सरकार के प्रेस इन्‍फारमेंशन ब्‍यूरो से प्रकाशनार्थ प्राप्‍त हुयी थी, यह भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिकृत प्रेस विज्ञप्ति थी ।

संभवत: उनकी यह सेवा प्रारंभ हो चुकी है, या फिर आने वाले चन्‍द दिनों में प्रारंभ होने जा रही है, आप ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की वेबसाइट खोल कर देंख लें आपको ताजा सूचनायें मिल जायेंगीं । यदि हमें भविष्‍य में आगे इस समाचार का अपडेट मिला तो हम अवश्‍य प्रकाशित करेंगें ।      

 

प्रश्‍न: मैं मोदी रबर का पिछले पॉंच साल से डीलर हूं, अब यह कम्‍पनी बिना किसी सूचना के बन्‍द हो गयी है, अब मैं अपना जमा धन कैसेट वापस करूं - प्रदीप गुप्‍ता, पता नहीं लिखा गया है

प्रश्‍न: मैं मोदी रबर का पिछले पॉंच साल से डीलर हूं, अब यह कम्‍पनी बिना किसी सूचना के बन्‍द हो गयी है, अब मैं अपना जमा धन कैसेट वापस करूं - प्रदीप गुप्‍ता, पता नहीं लिखा गया है

 

i am a dealer of modi rubber compny from 5 years. now company has closed without notice in 2001. now i want to information of which type  we can take our deposit .and when will claim( in the year) .

                                        kindly give suggesation of this.

                                                                                            thanks.

           

उत्‍तर: आने अपनी शिकायत में विस्‍तृत हवाला नहीं दिया है, यदि कम्‍पनी कम्‍पनी अधिनियम के तहत पंजीकृत है, तो कम्‍पनी अधिनियम 1956 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही प्रारंभ कर सकते हैं । यदि आप किसी ऐसे शख्‍स का नाम पता जानते हैं, जो कम्‍पनी के निदेशक मण्‍डल में रहा हो, तो आप उसी व्‍यक्ति से कार्यवाही प्रारंभ करें, आप धन वसूली एवं क्षतिपूर्ति वाद न्‍यायालय में प्रारंभ कर सकते हैं । यदि प्रकरण की परिस्थितियां धोखाधड़ी से सम्‍बन्धित हैं तो आप आपराधिक प्रकरण दर्ज करा सकते हैं, फिर यह पुलिस का काम है कि वह कम्‍पनी रजिस्‍ट्रार से, मुकम्‍मल मालूमात हासिल कर संबंधितों के विरूद्ध कार्यवाही करे । वैसे आप इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन एवं कम्‍पनी कार्य मंत्रालय को ऑन लाइन शिकायत के रूप में दर्ज करा कर भी कार्यवाही प्रारंभ करवा सकते हैं । प्रकरण विस्‍तृत रूप में मय दस्‍तावेज भेजें तो आपको अधिक व पुष्‍ट मार्ग दर्शन दिया जा सकेगा ।

 

प्रश्‍न: मैंने बी.एड. प्रवेश हेतु ऑंन लाइन पंजीयन एक कियोस्‍क सेण्‍टर के माध्‍यम से कराया था, मैं कैसे पता लगाऊं कि मेरा पंजीयन असली है या नकली और मेरी फीस जमा हुयी कि नहीं । पूनम तिवारी, खेरापति कालोनी, लश्‍कर, ग्‍वालियर म.प्र.

प्रश्‍न: मैंने बी.एड. प्रवेश हेतु ऑंन लाइन पंजीयन एक कियोस्‍क सेण्‍टर के माध्‍यम से कराया था, मैं कैसे पता लगाऊं कि मेरा पंजीयन असली है या नकली और मेरी फीस जमा हुयी कि नहीं । उसने मुझसे 5800 रू. वसूले थे, क्‍या मैं उपभोक्‍ता फोरम में इसकी ऑन लाइन शिकायत कर सकतीं हूं ।  पूनम तिवारी, खेरापति कालोनी, लश्‍कर, ग्‍वालियर म.प्र.

उत्‍तर : प्रिय पूनम जी, कियोस्‍क सेण्‍टर पर केवल 5100 रूपये का ही भुगतान करना था, आपसे 5800 रूपये लिये गये हैं यह अनुचित व अवैध है, आपने उल्‍लेख नहीं किया है कि आपको रसीद कितने रूपयों की दी गयी है, यदि रसीद केवल 5100 रूपये की है तो आप या तो 700 रूपये वापस मांगें या 700 रूपये की रसीद भी आवश्‍यक रूप से प्राप्‍त करें । इस सम्‍बन्‍ध में आप अपनी शिकायत म.प्र. शासन के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एवं एम.पी.ऑन लाइन डॉट जीओवी डॉट इन पर उपलब्‍ध ई मेल पतों और फोन व फैक्‍स नंबरों पर दर्ज करायें । आपकी शिकायत यदि मुकम्‍मल तौर पर सुनी नहीं जाती तो आप सीधे मुख्‍यमंत्री को आनलाइन शिकायत दर्ज करा दें । आप उपभोक्‍ता फोरम या कोर सेण्‍टर में भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकतीं हैं । उपभोक्‍ता फोरम में अभी ऑन लाइन शिकायत सुविधा नहीं है, लेकिन आप कोर सेण्‍टर में ऑन लाइन शिकायत दर्ज कर सकतीं हैं । इसके लिये आप हमारी ई सेवाओं का उपयोग कर सकतीं हैं ।

जहॉं तक आपके पंजीयन के असली होने या शुल्‍क भुगतान की जानकारी का प्रश्‍न है, सम्‍बन्धित वेबसाइट अभी अपरिपक्‍व व शैशव अवस्‍था में है, आप पृथक से इस पर लॉगआन करके बी.एड सम्‍बन्‍धी पृष्‍ठ व फोल्‍डर में पहुँच कर ''व्‍यू  माई एप्‍लीकेशन स्‍टेटस''  पर क्‍िलिक करें सारी वस्‍तुस्थिति सामने आ जायेगी । यहॉं आपसे आपका पंजीयन क्रमांक व जन्‍म दिनांक पूछी जायेगी जिसे आप भर दें ।

 

रविवार, 6 जुलाई 2008

प्रश्‍न: क्‍या चम्‍बल के डकैत अब भी घोड़ों पर भागते हैं, जैसा हम फिल्‍मों में देखते हैं – मनु देसाई, अहमदाबाद गुजरात

प्रश्‍न: क्‍या चम्‍बल के डकैत अब भी घोड़ों पर भागते हैं, जैसा हम फिल्‍मों में देखते हैं – मनु देसाई, अहमदाबाद गुजरात

उत्‍तर- मनु जी, नहीं आजकल चम्‍बल में न घोड़े बचे हैं, और न डकैत घोड़ों पर दौड़ते हैं, किसी जमाने में आज से तीस चालीस साल पहले जरूर यहॉं डकैत घोड़ों पर दौड़ते थे, तब यहॉं बहुत घोड़े थे और हर जगह हर गॉंव में घुड़साल हुआ करती थी, आवागमन के तब अन्‍य कोई साधन नहीं थे केवल घोड़े ही लोगों की यात्रा के साधन थे । अब तो मोटर साइकिले, चार पहिया वाहनों और अन्‍य द्रुत गति वाहनों का चम्‍बल में हर गॉंव शहर में उपयोग किया जाता है, आजकल के डकैत तो लम्‍पट और छिछोरे मात्र हैं जो महज अपहरण, चोरी चपाटी जैसे कार्य धन कमाने हेतु कर रहे हैं, जो कि अधिकांशत: शहरों में ही रहते हैं और बाहर के शहरों में ही अधिकांश फरारी जीवन काटते हैं, और बाकायदा अपने बीवी बच्‍चों के साथ रहते हैं तथा आपराधिक वारदातों का अंजाम अन्‍यत्र देते हैं, चम्‍बल के बीहड़ों में तो अब यदा कदा ही कभी कभार कोई डकैत दिखाई देता है । वह भी पैदल या आधुनिक वाहनों पर सवार, अधिकतर डकैत राजनेताओं या पुलिस के संरक्षण में रहते हैं और बाकायदा नेताओं, मंत्रियों व पुलिस अधिकारीयों को डकैतों से हफ्ता या वसूली कमीशन बंधा रहता है । आप हमारा आलेख मुरैना डायरी चम्‍बल की कानून व्‍यवस्‍था पढ़ते रहें, आपको सारा सिस्‍टम समझ आ जायेगा, यह श्रंखलाबद्ध आलेख है, इसकी अगली किश्‍त शीघ्र ही आपको पढ़ने को मिलेगी, आपने इसके प्रकाशन के विलम्‍ब का कारण पूछा है, हम आपको बताना चाहते हैं, कि इसका प्रकाशन स्‍थगित नहीं किया गया है और न रोका गया है, दरअसल बीच बीच में हम पर बहुत अधिक कार्यभार बढ़ जाता है और अचानक इमर्जेन्‍सी कवरेज और तत्‍काल प्रकाशन योग्‍य सामग्री बहुत अधिक आ जाती है, हमारे संसाधन सीमित हैं अत: कई बार चाहते हुये भी स्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं रहतीं और कई सामायिक प्रकाशन रोक कर इमर्जेन्‍सी व तात्‍कालिक प्रकाशन जारी करने पड़ते हैं, दूसरे यहॉं बिजली कटौती दिन रात कभी भी होती रहती है और कई प्रकाशन बिजली कटौती के चलते विलम्‍बग्रस्‍त हो जाते हैं । आपके अन्‍य सवालों के उत्‍तर हम अपने आलेख में देंगें (वैसे आप उसे पढ़ते रहें उसमें पहले से लगभग सारे उत्‍तर समाहित कर लिये गये हैं) आश्‍चर्य जनक तथ्‍य यह है कि इस आलेख के सम्‍बन्‍ध में सबसे अधिक आतुरता तो हमारी स्‍थानीय चम्‍बल में हैं, बहुत से लोग इसकी अगली किश्‍तों के लिये हमारे कार्यालय में ही आ धमकते हैं और अगली किश्‍त की प्रतियां मांगते हैं, हम खुद भी परेशान हो जाते हैं, आप निश्चिन्‍त रहें यह आलेख नियमित रहेगा ।              

शुक्रवार, 27 जून 2008

प्रश्‍न : आपकी नजर में म.प्र. में अबकी बार किसकी सरकार बनने जा रही है – विजय गुप्‍ता, माताप्रसाद गुप्‍ता, सिन्‍धी कालोनी मुरैना

प्रश्‍न : आपकी नजर में म.प्र. में अबकी बार किसकी सरकार बनने जा रही है – विजय गुप्‍ता, माताप्रसाद गुप्‍ता, सिन्‍धी कालोनी मुरैना

उत्‍तर – भाई विजय और माताप्रसाद जी, हालात रोज बदल रहे हैं, आधे पत्‍ते उधर झुकते हैं तो एक घण्‍टे बाद दूसरी ओर झुक जाते हैं अभी तो ऊहापोह ही मानिये । वैसे अगर आप हमारी परिसीमन के ऊपर चल रहा धारावाहिक आलेख अगर लगातार पढ़ रहे होंगें, तो परिदृश्‍य कुछ समझ आ रहा होगा । फिलहाल अगली कड़ी का इंतजार करिये कुछ कुछ माजरा साफ हो जायेगा । आज किसी का मुख्‍यमंत्री लोकप्रिय हो जाता है तो नीचे से उसकी सवारी खिसक रही है, दूसरी पार्टी का मुख्‍यमंत्री अभी साफ नहीं है इसलिये परिदृश्‍य खुल कर साफ नहीं हो पा रहा । वैसे अबकी बार चुनाव पूरा टिकिट वितरण पर आधारित होगा । आगे आप भी इंतजार कीजिये हम भी इंतजार कर रहे हैं कि कौनसा दल किसे अपना उम्‍मीदवार कहॉं कहॉं बनाता है । आपने मुरैना सीट के बारे में जो पत्र में लिखा है, हमारी नजर में सभी दल अगर टिकिट यानि अपने प्रत्‍याशी रिपीट करते हैं तो रिजल्‍ट भी रिपीट हो सकता है । आपके अन्‍य सवालों का जवाब हम अपने अगले लेख में अवश्‍य देंगें ।   

शनिवार, 14 जून 2008

प्रश्‍न: क्‍या ज्‍योतिष सही होता है, यदि हॉं तो अधिकतर भविष्‍यवाणीयां गलत क्‍यों हो जाती हैं – विभा अग्रवाल, बीकानेर, राजस्‍थान

प्रश्‍न: क्‍या ज्‍योतिष सही होता है, यदि हॉं तो अधिकतर भविष्‍यवाणीयां गलत क्‍यों हो जाती हैं – विभा अग्रवाल, बीकानेर, राजस्‍थान

उत्‍तर: विभा जी, भारतीय ज्‍योतिष परम्‍परा के मुताबिक भारतीय ज्‍योतिष विशुद्ध गणित पर आधारित होता है, और इसका गणित जितना सटीक होता है, फलित उतना ही सही और पुष्‍ट होता है । अधिकांश ज्‍योतिषी इसके गणित व विज्ञान की सटीक व सही गणना नहीं कर पाते अत: इसका फलित गलत हो जाता है और व्‍यर्थ ही भारत की यह अमूल्‍य व महत्‍वपूर्ण विद्या बदनाम होती है । इसे जब कोई गणित व विज्ञान से सम्‍बन्धित विद्वान उपयोग करता है तो फलित अधिक सटीक व सही आता है । अब तक तो भारतीय ज्‍योतिष में काफी काम हो चुका है और मनुष्‍य के पिछले जन्‍म तक का हाल जन्‍मकुण्‍डली बयां करने लगी है । किन्‍तु इसमें सही व सटीक फलित के लिये काफी साधना और ईश्‍वरीय कृपा के साथ अतीन्द्रिय ज्ञान व गणित एवं विज्ञान की विशेषज्ञाता आवश्‍यक है । अन्‍यथा फलित सही नहीं होगा । अख्‍ाबारों आदि में नित्‍य छपने वाले भविष्‍यफल पूर्णत: बेमानी हैं क्‍योंकि हर राशि/ व्‍यक्ति का भविष्‍यफल उसकी खुद की जन्‍मकुण्‍डली के अनुसार निधार्रित होता है ।